Maurya Vansh मौर्य वंश का इतिहास Hindi में

दोस्तों आज फिर से आपका www.newsdunia.in में स्वागत है अगर आप भारत के रहने वाले है तो आपको भारत की अच्छी जानकारी होना आवश्यक है और अगर ऐसा भी है की आप भारत के रहने वाले नहीं भी है तो भी आपको ज्ञान होना जरुरी है क्युकी भारत में निकलने किसी भी भर्ती भर्ती में भारत के इतिहास की जेकरि होना जरुरी है हम मौर्य वंश की जानकारी को आप तक अपनी इस Post के तहत पहूँचा रहे है अत: आप सभी से अनुरोध है की आप सभी इन जानकारियों को डोलोड करके इनका अध्यन करे ताकि Bharat में होने वाले किसी भी प्रश्न पत्र को आसानी से हल कर सके !
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«मौर्य साम्राज्य»

मौर्य वंश के प्रमुख शासकों की सूची

क्र.सं शासक शासन काल
1. चन्द्रगुप्त मौर्य 322 ईसा पूर्व- 298 ईसा पूर्व
2. बिन्दुसार 298 ईसा पूर्व –269ईसा पूर्व
3. अशोक 269ईसा पूर्व –232 ईसा पूर्व
4. दशरथ मौर्य 232 ईसा पूर्व- 224 ईसा पूर्व
5. सम्प्रति 224 ईसा पूर्व- 215 ईसा पूर्व
6. शालिसुक 215 ईसा पूर्व- 202 ईसा पूर्व
7. देववर्मन 202 ईसा पूर्व –195 ईसा पूर्व
8. शतधन्वन मौर्य 195 ईसा पूर्व 187 ईसा पूर्व
9. बृहद्रथ मौर्य 187 ईसा पूर्व- 185 ईसा पूर्व

  «चन्द्रगुप्त मौर्य»

मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य थे चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 347 ईo पूर्व में हुआ था चन्द्रगुप्त मगध की राजगद्दी पर 322 ईo पूर्व में बैठा धनानद को हराने के बाद चन्द्रगुप्त ने चाणक्य को अपना प्रधानमंत्री बनाया क्युकी चाणक्य ने धनानद को हराने में चन्द्रगुप्त मौर्य की मदद की थी चाणक्य द्वारा लिखी हुई पुस्तक अर्थशास्त्र है जिसका संबंध राजनीति से है चन्द्रगुप्त सबसे ज्यादा जैनधर्म को ही मानता था क्युकी यह जैनधर्म का अनुयायी था चन्द्रगुप्त ने अपना अंतिम समय कर्णाटक के श्रवणबेलगोला नमक स्थान पर बिताया !
चन्द्रगुप्त ने 305 ईo में सेल्यूकस निकेटर को भी हराया सेलिक्स निकेटर
ने हारने के बाद अपनी पुत्री करनोलिया की शादी चन्द्रगुप्त मौर्य के साथ कर दी और अपने राज्यों में से चार प्रान्त भी चन्द्रगुप्त मौर्य को दे दिए चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैनी भद्रबाहु से जैन धर्म की दीक्षा ली थी मेगास्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था जो चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहता था मेगास्थनीज द्वारा लिखी गयी पुस्तक इंडिका है चन्द्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस के बिच हुए युद्ध का वर्णन एसीपियन्स ने किया है चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु 298 ईo पूo में श्रवणबेलगोला में उपवास के द्वारा हुई थी !

बिन्दुसार

चन्द्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी बिन्दुसार हुआ, जो 298 ईo पूo में राजगद्दी पर बैठा यह आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था इसको अमित्रघात के नाम से भी जाना जाता था !
अमित्रघात का अर्थ होता है शत्रु विनाशक
वायुपुराण में बिन्दुसार को एक अलग ही नाम से जाना जाता है भद्रसार
जैनग्रंथो में बिन्दुसार को सिंहसेन कहा गया है स्ट्रेबो के अनुसार सीरियन नरेश एनिटीयोक्स ने बिन्दुसार के दरबार में डाइमेक्स नामक राजदूत भेजा, इसे ही मेगेस्थनीज का उत्तराधिकारी माना जाता है तक्षशिला में हुए दो विद्रोह का वर्णन भी बिन्दुसार के शासन कल में ही है इस विद्रोह को बंद करने के लिए पहले सुसीम और बाद में अशोक को भेजा एथीनियस के अनुसार बिन्दुसार ने सीरिया के शासक एण्टियोकस -! से मंदिरा, सूखे अंजीर एवं एक दार्शनिक भेजने की प्रार्थना की बौद्ध विद्धान तरनाथ ने बिन्दुसार को 16 राज्यों का विजेता बताया है !

अशोक

बिन्दुसार का उत्तराधिकारी अशोक महान हुआ जो की 269 ईo पूo में मगध की राजगद्दी पर बैठा राजगद्दी पर बैठने से पहले अशोक अवन्ती का राजयपाल था मास्की एवं गुर्जरा अभिलेख में अशोक का नाम अशोक मिलता है जबकि पुराणों में अशोक का नाम अशोक न मिलकर अशोकवर्धन मिलता है अशोक ने राजगद्दी पर बैठने के आठ वर्ष बाद 261 ईo पूo में कलिंग पर आक्रमण किया और कलिंग की राजधानी तोसलि पर अपना अधिकार कमा लिया !
“पिलनी के एक कथन के अनुसार मिस्र का राजा फिलाडेल्फस [टॉलमी !!] ने पाटिलपुत्र में डियानासियस नाम का एक राजदूत भेजा था (अशोक के दरबार में) उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु ने अशोक को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी अशोक ने आजीविकों को रहने के लिए बराबर की पहाड़ियों में चार गुफाओ का निर्माण करवाया, जिन चार गुफाओ का नाम कर्ज, चोपार, सुदामा तथा विश्व झोपडी था !

प्रशासनिक समिति एवं उसके कार्य

समिति कार्य
प्रथम उधोग एवं शिल्प कार्य का निरीक्षण
द्वितीय विदेशियों की देखरेख
तृतीय जन्म मरण का विवरण रखना
चतुर्थ व्यपार एवं वाणिज्य की देखभाल
पंचम निर्मित वस्तुओ के विक्रय का निरीक्षण
छटम बिक्री का वसूल करना

 अशोक के पौत्र दशरथ ने आजीविकों को नागार्जुन गुफा प्रदान की थी

सैन्य समिति व् उनके कार्य

समिति कार्य
प्रथम जलसेना की व्यवस्था
द्वितीय यातायात एवं रसद की व्यवस्था
तृतीय पैदल सेनिको की देख-रेख
चतुर्थ अश्वरोहियो की सेना की देख रेख
पंचम गजसेना की देख-रेख
छटम रतसेना की देख-रेख

अशोक की माता का नाम सुभद्रांगी था अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेंद्र एवं अपनी पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा भारत में शिलालेख के प्रचलन सवर्पर्थम अशोक ने किया अशोक के अभिलेखों को तीन भागो में बाटा जा सकता है
(!) शिलालेख (!!) स्तम्भलेख (!!!) गुहालेख
अशोक के शिलालेख की खोज 1750 ईo पोद्रेटी फेनथेलर ने की थी जिनकी संख्या 14 है अशोक के अभिलेख पढ़ने में सबसे पहली सफलता 1837 ईo में जेम्स प्रिसेप को हुई !

सम्राठ की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिष्द होती थी जिसमे सदस्यों की संख्या 12,16 या 20 हुआ करती थी अर्थशास्त्र के शीस्र्स्थ अधिकारी के रूप में तीर्थ का उल्लेख मिलता है, जिसे महामात्र भी कहा जाता है इसकी संख्या 18है अर्थशास्त्र में चर जासूस को कहा गया है अशोक के समय मौर्य साम्राज्यों के प्रांतो की संख्या 5थी प्रांतो को चक्र कहा जाता है प्रांतो के प्रशासक कुमार या आर्यपुत्र या राष्ट्रिक कहलाते थे प्रांतो का विभाजन विषय में किया गया था जो विषयपति के अधीन होते थे प्रशासन की सब्सि छोटी इकाई ग्राम थी, जिसका मुखिया ग्रामिक कहलाता था प्रशासको में सबसे छोटा गोप होता था जो की 10 ग्रामो का शासन संभालता था मेगस्थनीज के अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों का एक मंडल करता था जो की 6 समितियों में विभाजित था प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे !

  • जरूर पढ़े:-  मौर्य वंश का इतिहास PDF में

बिक्री-कर के आधार पर मूल्य का केवल 10वा भाग वसूला जाता था इसे बचने वाले को मृत्युदण्ड दिया जाता था मेगस्थनीज के अनुसार एग्रोनोमाई मार्ग निर्माण अधिकारी था जस्टिन के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना में लगभग 50,000 अश्वारोही सैनिक,9000 हठी एवं 8000 रथ थे प्लूटार्क/जस्टिन के अनुसार चन्द्रगुप्त ने नन्दो की पैदल सेना से तीन गुनी थी अधिक संख्या में अर्थात 60,000 आदमियो को लेकर सम्पूर्ण उत्तर-भारत को रौंद डाला था युद्ध-क्षेत्र में सेना का नेतृत्व करने वाला अधिकारी नायक कहलाता था सैन्य विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी सेनापति होता था अशोक के समय जनपदीय न्यायलय के न्यायधीश को रजक कहा जाता था सरकारी भूमि को सीता भूमि कहा जाता था बिना वर्षा के अच्छी खेती होने वाली भूमि को अदेवमातृक कहा जाता था स्वतंत्र वेस्यवृति को अपनाने वाली महिला रूपजीवा कहलाती थी नन्द वंश का विनाश करने में करने चन्द्रगुप्त मौर्य ने कश्मीर के राजा पर्वतक से सहायता प्राप्त की थी मौर्य शासन 137 वर्षो तक रहा मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था इसकी हत्या इसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 185 ईo पूर्व में कर दी और मगध पर शुंग वंश की नीव डाली !

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